अफगानिस्तान में जब से तालिबान सरकार बनी है तभी से यहां महिलाओं जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई है। देश की करीब 2 करोड़ से ज्यादा महिलाएं अपनी जिंदगी के हर पहलू जैसे शिक्षा, रोजगार और यहां तक कि आने जाने के लिए किसी मेल कंपेनियन पर निर्भर हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य से लेकर राजनीति तक में महिलाओं की एंट्री पर अंकुश उनकी जिंदगी इकलौता किरदार पत्नी का छोड़ते हैं। अब पत्नियों के खिलाफ तालिबान सरकार ने एक नया कानून पास किया है। अफगानिस्तान के सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने 90 पेज का एक नया पीनल कोड लागू किया है।
जिसमें यहां पत्नी को उसका पति पीट सकता है और उसे ये कानूनी अधिकार रहेगा बशर्ते कोई हड्डी न टूटे। इस नए कानून को वैश्विक तौर पर आलोचनाओं के घेरे में देखा जाने लगा है। बॉलीवुड के दिग्गज राइटर जावेद अख्तर ने भी इस कानून की कड़ी आलोचना करते हुए अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर महिलाओं के प्रति होने वाली इस क्रूरता को लेकर गुस्सा जाहिर करते हुए लिखा, 'तालिबान ने अपनी पत्नी को पीटना कानूनी तौर पर लीगल कर दिया है, बस हड्डी नहीं टूटनी चाहिए। अगर एक पत्नी अपने पति से बिना पूछे मायके चली जाती है तो उसे 3 महीने तक की जेल भी हो सकती है। मैं मुफ्ती और मुल्लाओं से गुजारिश करता हूं कि इन नियमों का बिना किसी शर्त के विरोध करें!!! क्योंकि ये धर्म के नाम पर हो रहा है।'
अफगानिस्तान में महिलाओं की जिंदगी काफी मुश्किल है और यहां छोटी लड़कियों को सेकेंडरी स्कूल या फिर छटवीं क्लास के बाद से स्कूल में पढ़ने की अनुमति नहीं होती। साथ ही इंजीनियरिंग, एग्रीकल्चर, जर्नलिज्म और माइनिंग तक में महिलाओं की एंट्री लगभग बैन है। ऐसे में छोटी बच्चियों के बड़े होने पर केवल पत्नी का रोल ही निभाने को बचता है। पीनल कोड के नए नियमों के मुताबिक पति अगर अपनी पत्नी को पीटता है और कोई चोट के निशान दिखते हैं या फिर हड्डी टूट जाती है तो उसे केवल 15 दिनों की ही जेल होगी। वहीं पत्नी को अपनी चोट को साबित करने के लिए प्रावधान भी कड़े कर दिए गए हैं। खास बात ये है कि अगर पत्नी अपने पति को बताए बिना मायके चली जाती है तो उसे 3 महीने तक की जेल हो सकती है।
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